विंशोत्तरी दशा जन्म-नक्षत्र से शुरू होकर ग्रह-अधिपतियों के एक निश्चित क्रम से चलती है।

दशा को समय के एक ढाँचे की तरह समझना बेहतर है: यह जीवन के किसी दौर पर सवाल उठाती है, पर आपके चुनाव, परिस्थितियाँ या ज़िम्मेदारी को नहीं हटाती।