Vidya

Jyotish Ki Mool Baatein

Nakshatra, lagna, panchang, dasha aur tyohaar — saral bhasha mein, taaki aap Pandit Ji se apna sawal aur bhi behtar poochh sakein.

Muft Kundli

Janm-tithi, samay aur shahar daaliye — lagna, graha-sthiti aur vimshottari dasha ke saath poori kundli turant dekhein.

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Ank-Jyotish (Numerology)

Apni janm-tithi se jeevan-path, janm-din aur vyaktigat varsh ka ank turant nikalein — muft aur turant.

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Tarot Reading

78-patton ki poori maala se ek patta khinchiye aur apne sawal ke liye ek chintan-drishti paayein — muft.

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Panchang Aur Tyohar Calendar

Aaj ka panchang aur agle 12 mahine ke sabhi tyohar, vrat aur ekadashi — live ganana se, muhurat samay ke saath.

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Hindu Chandra Maheene

Chaitra se Phalguna tak — 12 chandra maheene, unki ritu aur mukhya tyohar.

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नक्षत्र क्या है?

चंद्रमा के 27 नक्षत्र राशि से भी अधिक सूक्ष्म, व्यक्तिगत परत दिखाते हैं।

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लग्न को समझें

जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उभरती राशि लग्न है; यही कुंडली के भावों का आधार बनती है।

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तिथि कैसे काम करती है?

सूर्य और चंद्रमा के बदलते कोणीय अंतर से बनने वाला चंद्र-दिन तिथि कहलाता है।

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पंचांग के पाँच अंग

तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण—ये पारंपरिक दैनिक पंचांग के पाँच अंग हैं।

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दशा क्या है?

दशाएँ ग्रहों की पारंपरिक अवधि-श्रृंखलाएँ हैं, जिनसे जीवन के बदलते दौरों पर विचार किया जाता है।

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स्थान कुंडली को क्यों बदलता है?

निर्देशांक और समय-क्षेत्र नियम लग्न, सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के समय को बदलते हैं।

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महाशिवरात्रि

शीत ऋतु का अंत · फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी। परंपरा में इसका निर्णय निशीथ काल में चतुर्दशी के रहने से किया जाता है।

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होली

वसंत · फाल्गुन पूर्णिमा। होलिका दहन और रंगवाली होली—दोनों अलग अनुष्ठान हैं; अग्नि-पूजन का समय स्थानीय पंचांग से तय होता है।

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रक्षाबंधन

वर्षा ऋतु · श्रावण पूर्णिमा। यह पर्व पूर्णिमा पर मनाया जाता है; पारिवारिक विधि के लिए स्थानीय समय देखें।

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जन्माष्टमी

वर्षा ऋतु · भाद्रपद कृष्ण अष्टमी। मुख्य नियम निशीथ काल में अष्टमी का होना है, केवल दिन में किसी समय अष्टमी होना नहीं।

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गणेश चतुर्थी

वर्षा ऋतु का उत्तरार्ध · भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी। चतुर्थी मुख्य चंद्र-तिथि है; परिवार अक्सर स्थानीय मध्याह्न पूजा-समय मानते हैं।

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विजयादशमी

शरद ऋतु · आश्विन शुक्ल दशमी। परंपरा में दशमी का विचार अपराह्न के अनुष्ठान-समय पर किया जाता है।

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दीपावली

शरद ऋतु · कार्तिक अमावस्या। लक्ष्मी पूजा का संबंध प्रायः प्रदोष काल में अमावस्या के रहने से है—अर्थात स्थानीय सूर्यास्त के आसपास।

Apna khaas sawal poochein

Yeh sab padhne ke baad bhi jo sawal mann mein rahe, Pandit Ji se seedha poochein.

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