होली ऋतु का मोड़ है—पुराने को छोड़ना, नई ऊर्जा और मिलकर आनंद मनाना।
होलिका दहन के लिए अपने शहर का स्थानीय मुहूर्त देखें। इसके बाद रंगवाली होली सामुदायिक उत्सव के रूप में मनाई जाती है।
वसंत · फाल्गुन पूर्णिमा। होलिका दहन और रंगवाली होली—दोनों अलग अनुष्ठान हैं; अग्नि-पूजन का समय स्थानीय पंचांग से तय होता है।
होली ऋतु का मोड़ है—पुराने को छोड़ना, नई ऊर्जा और मिलकर आनंद मनाना।
होलिका दहन के लिए अपने शहर का स्थानीय मुहूर्त देखें। इसके बाद रंगवाली होली सामुदायिक उत्सव के रूप में मनाई जाती है।
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