एक चंद्र मास में तीस तिथियाँ होती हैं: शुक्ल पक्ष में पंद्रह और कृष्ण पक्ष में पंद्रह।
तिथि आधी रात से बंधी नहीं होती; वह घड़ी के किसी भी समय बदल सकती है। इसी कारण पंचांग में स्थानीय सूर्योदय और विशेष अनुष्ठान-समय महत्त्व रखते हैं।
सूर्य और चंद्रमा के बदलते कोणीय अंतर से बनने वाला चंद्र-दिन तिथि कहलाता है।
एक चंद्र मास में तीस तिथियाँ होती हैं: शुक्ल पक्ष में पंद्रह और कृष्ण पक्ष में पंद्रह।
तिथि आधी रात से बंधी नहीं होती; वह घड़ी के किसी भी समय बदल सकती है। इसी कारण पंचांग में स्थानीय सूर्योदय और विशेष अनुष्ठान-समय महत्त्व रखते हैं।
Ek "Namaste" bhejiye — do minute mein aapki kundli taiyaar, phir Pandit Ji se apna sawal poochein.
Chat on WhatsApp